
।। वंदेभारतलाइवटीव न्युज, शुक्रवार 03 अप्रैल 2026 ।।

सनातन धर्म के अनुसार वैशाख मास को अत्यंत पुण्यदायी मास माना गया है। वैशाख के इस महिने में अक्षय तृतीया, जानकि नवमी, वरूथनी एकादशी, परशुराम जयंती, मोहनी एकदशी व्रत, बुद्ध पूर्णिमा आदि भी आते हैं। यह वैशाख मास धर्म कर्म, यज्ञ हवन आदि के लिए उत्तम माना जाता है। वैशाख का यह महिना सभी देयताओं के द्वारा पूजित है; भगवान नारायण श्रीहरि विष्णुजी को यह मास अति प्रिय है। इस बार 2026 में वैशाख मास का शुभारंभ 03 अप्रैल दिन शुक्रवार से हो रहा है, और यह वैशाख महिना 01 मई शुक्रवार को समाप्त होगा। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार वैशाख के इस महिने में धन, अन्न, फल, वस्त्र, जल रखने का पात्र आदि दान धर्म करने का विशेष महत्व होता है। इस माह में ऋतु परिवर्तन के कारण सूर्य की गर्मी भी तीव्र हो जाती है। ऐसे समय में जल दान करना भी अत्यंत शुभदायी माना गया है। वैशाख के इस मास में नूतन कार्य जिसे कि नये घर का निर्माण कार्य आरंभ करना, वाहन खरीदना नये वसतुओं की खरीदारी आदि के लिए उचित समय रहता है। इस वैशाख मास में पवित्र तीर्थ स्थानो मे स्नान, व्रत पूजा, दान पुण्य, शुभ धार्मिक कार्य आदि करने पर शुभ फल की प्राप्ति होती है। वैशाख मास मे जानकि नवमी पर्व आता है जो कि जनक नंदनी जानकी जी का प्राकट्य उत्सव भी है। इस दिन सुहागिन माताएं बहने अपने सौभाग्य एवं पति की दीर्घायु कामनापूर्ति के लिए व्रत भी रखती हैं। वैशाख मास मे ही अक्षय तृतीया भी पड़ती है, इस दिन स्वर्ण आभूषण, रत्न आदि खरीदारी के लिए भी विशेष महत्व होता है। भविष्य पुराण के अनुसार अक्षय तृतीया के दिन सतयुग एवं त्रेतायुग का आरंभ और महाभारत युद्ध का अंत भी हुआ था। वैशाख मास मे ही बुद्ध पूर्णिमा का पर्व भी आता है, जो कि स्नान दान , माता लक्ष्मी जी श्रीहरि की पूजा के लिए उत्तम है। वैशाख का यह महिना हिन्दू पंचांग का एक अति पवित्र और विशेष महिना भी माना जाता है। वैशाख का यह महिना आमतौर पर अंग्रेजी माह अप्रैल मई के मध्य मे आता है। वैशाख मास को पुण्य अर्जन के लिए अच्छा समय भी माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस माह मे किए जा ने वाले अच्छे कर्मों का फल कई गुना अधिक बढ़ जाता है। पवित्र वैशाख मास मे बच्चों का नामकरण संस्कार, मुंडन संस्कार, विवाह योग्य पुत्र, पुत्रि का विवाह करना भी शुभ माना जाता है। इस माह में नये घर का निर्माण कार्य शुरू करना, गृह प्रवेश आदि भी शुभ माना जाता है। वैशाख मास में सत्संग पूजा-पाठ आदि लाभदायक माना जाता है। वैशाख मास में नित्य प्रतिदिन भगवान विष्णुजी और माता लक्ष्मी जी की पूजा आराधाना करना, तुलसी के पौधे के समक्ष दीप प्रज्वलित करना, शिवलिंग का अभिषेक करना, जरूरतमंद प्यासे लोगों को पानी पिलाना, वस्त्र, घड़ा फलों का दान , जरूरतमंद लोगों को जूते-चप्पल आदि का दान करना अन्न दान करना शुभफलदायक माना जाता है। वैशाख मास में सूर्यदेव मेष राशि में स्थित होते हैं, इससे जीवन में नवीन ऊर्जा और परिवर्तन भी देखने को मिलता है। इस बार वैशाख में प्रमुख पर्व व्रत-: मंगलवार 14 अप्रैल 2026 को मेष संक्राति, वैशाखी पर्व, रविवार 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया, परशुराम जयंती, गुरूवार 23 अप्रैल को गंगा सप्तमी, सोमवार 27 अप्रैल को मोहनी एकादशी व्रत, गुरूवार 30 अप्रैल को भगवान नृसिंह जयंती, शुक्रवार 01 मई 2026 को वैशाख पूर्णिमा, बुद्ध पूर्णिमा है। वैशाख के इस पवित्र माह में मांस मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए, लहसुन प्याज तामसिक चीजों से भी बचना चाहिए, रात्रिकालीन समय में घरों में भोजन करने के बाद जूठे बर्तन नहीं छोड़ना चाहिए, भोजन के बाद बर्तनों को रात मे ही साफ कर लेना चाहिए, वैशाख मास मे किसी से भी वाद विवाद करने से भी बचना चाहिए जल की बर्बादी नहीं करनी चाहिए। शुक्रवार 03 अप्रैल से वैशाख मास प्रारंभ हो रहा है, जो कि शुक्रवार 01 मई तक रहेगा। इस दौरान भगवान विष्णुजी की विशेष पूजा आराधना करने पर अनंत गुना शुभफल मिलता है। हिन्दू धर्म मे वैशाख मास का विशेष महत्व होता है। वैशाख मास का संबंध भगवान विष्णुजी से होता है, माना जाता है कि वैशाख पूर्णिमा के दिन ही भगवान विषणुजी ने कूर्म का अवतार लिया था, इन्हें कच्छप अवतार भी कहा जाता है। कूर्म अवतार भगवान विष्णुजी के दूसरे अवतार माने जाते हैं। हिन्दू पंचांग कैलेंडर में वैशाख मास को वर्ष का दूसरा महिना माना जाता है, हिन्दू नववर्ष की शुरुआत चैत्र मास श्रीराम नवमी के दिन से होता है। हिन्दू पंचांग कैलेंडर में महीनों का नाम उस नक्षत्र के आधार पर तय किया जाते हैं जिसमें कि पूर्णिमा के दिन चंद्रमा स्थित होते हैं। इसके अनुसार ही इस महिने का नाम वैशाख रखा गया है। वैशाख मास पूर्णिमा के दिन चंद्रदेव विशाखा नक्षत्र मे स्थित रहते हैं, इसलिए इस महिनों को वैशाख मास भी कहा जाता है। वैशाख मास मे पवित्र जलाशयों नदियों में स्नान करने का अति शुभ महत्व होता है इस महिने मे प्रतिदिन सूर्योदय से पूर्व किसी भी पवित्र तीर्थ, सरोवर, नदी या कुएं के जल मे स्नान करना शुभ माना गया है घर से बाहर कहीं स्नान संभव नही होने पर अपने घर पर ही पवित्र तीर्थों का और प्रभू का स्मरण करते हुए सूर्योदय से पूर्व स्नान करना चाहिए। वैशाख के महिने मे पीपल वृक्ष पर जल चढ़ाना और पीपल के पास दीप प्रज्वलित करना शुभ होता है।











